Saturday, 25 January 2014

जनतंत्र का जनाजा !


सदन के पटल पर,
 जैसे ही आया प्रस्ताव I
 जेल में सजायाफ्ता कैदी,
 भी लड़ सकेंगे चुनाव I
 लोकतंत्र के मंदिर में बैठे,
 कौओं ने किया समवेत कांव-कांव I
 न्यायपालिका की पिटी भद्द,
 और फिरा उलटा दांव I
 नरभक्षी नेताओं ने न,
 देखा आव न देखा ताव I
 बस पंद्रह मिनटों में ही,
 हो गया पारित प्रस्ताव I
 भैया, कराहती जनता,
 और चुप राजा हैI
 दुनिया के सबसे जाली.
 जनतंत्र का यह जनाजा हैI  

         ----- विश्वमोहन