Thursday, 25 July 2019

कारगिल की यहीं कहानी।

सिंधु की धारा में धुलता
'गरकौन' के गांव में।
था पलता एक नया 'याक'
उस चरवाहे की ठाँव में।

पलता ख्वाबों में अहर्निश,
 उस चौपाये का ख्याल था।
सर्व समर्पित करने वाला,
वह 'ताशी नामोग्याल' था।

सुबह का निकला नित्य 'याक',
संध्या घर वापस आ जाता।
बुद्ध-शिष्य 'ताशी' तब उस पर,
करुणा बन कर छा जाता।

एक दिन 'याक' की पथ-दृष्टि,
पर्वत की खोह में भटक गयी।
इधर आया  न देख  शाम को,
'तासी' की सांसें अटक गई।

खोज 'याक' ही दम लेगा वह,
मन ही मन यह ठान गया।
खोह-खोह कंदर प्रस्तर का,
पर्वत मालाएं छान गया।

हिमालय के हिम-गह्वर में,
ताका कोना-कोना 'ताशी'।
दिख गए उसको घात लगाए,
छुपे बैठे कुछ परवासी।

पाक नाम नापाक मुल्क से,
घुसपैठी ये आये थे।
भारत माँ की मर्यादा में,
सेंध मारने आये थे।

सिंधु-सपूत 'ताशी' ने भी अब,
 'याक' को अपने भुला दिया।
लेने लोहा इन छलियों से,
अपनी सेना को बुला लिया।

वीर-बांकुड़े भारत माँ के,
 का-पुरुषों पर कूद पड़े।
पट गयी धरती लाशों से,
थे बिखरे ज़ुल्मी मरे गड़े।

स्वयं काली ने खप्पर लेकर,
चामुंडा संग हुंकार किया।
रक्तबीजों को चाट चाटकर,
पाकिस्तान संहार किया।

'द्रास', 'बटालिक' बेंधा हमने
'तोलोलिंग' का पता लिया।
मारुत-नंदन 'नचिकेता' ने
यम का परिचय बता दिया।

पाकिस्तान को घेर-घेर कर,
जब जी भर भारत ने छेंका।
होश ठिकाने आये मूढ़ के,
घाट-घाट घुटने टेका।

करे नमन हम वीर-पुत्र को,
और सिंधु का जमजम पानी।
'पगला बाबा' की कुटिया से,
कारगिल की यहीं कहानी।




'पगला बाबा' की कुटिया --  कारगिल के 'बीकन' सैन्य-संगठन क्षेत्र में एक ऊपरी तौर पर मानसिक रूप से अर्द्धविक्षिप्त साधु बाबा अपनी कुटिया बनाकर रहते थे। कहते हैं कि कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान की ओर से दागे गए जो भी गोले उस कुटिया के आस-पास गिरते, वे फट ही नहीं पाते। युद्ध समाप्ति के बाद सेना ने उस क्षेत्र को उन जिंदा गोलों से साफ किया। बाद में बाबा की मृत्यु के बाद सेना ने उनके सम्मान में सुंदर मंदिर बनवाया जहाँ आज भी नित्य नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है।


32 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (26-07-2019) को "करगिल विजय दिवस" (चर्चा अंक- 3408) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!

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  2. स्वार्थ से परे रखा .जज़्बातों की अनुभूति,दर्द को बहुत गहरे से कहा है।

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!

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  3. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २६ जुलाई २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  4. अत्यंत सुन्दर सृजन !!

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका।

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  5. नमन वीरों को। बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!

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  6. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 26 जुलाई 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  7. आत्म मुग्ध करता कथा काव्य ,सारी जानकारीयां
    समेटे ,प्रवाह लिए,अप्रतिम सृजन।

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    1. जी, बहुत आभार आपके आशीष का।

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  8. सार्थक सृजन आदरणीय

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  9. बेहतरीन रचना

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  10. कारगिल का इतिहास और वीरों की शौर्य-गाथा का सुंंदर साहित्यिक काव्य-शिल्पात्मक वर्णन।
    हमेशा की तरह सराहनीय सृजन आदरणीय।

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  11. कारगिल युद्ध की शौर्य-गाथा का लाजवाब काव्यात्मक शब्दचित्रण....।
    वाह!!!!

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    1. जी, आभार। आपके सुंदर शब्द हमें सदैव प्रोत्साहित करते हैं।

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  12. कारगिल युद्ध के गुमनाम नायक 'ताशी नामोग्याल' से लेकर भारतीय सेना के जांबाज वीरों की शौर्य गाथा को बहुत ही सार्थकता से शब्दांकित किया है आपने | ताशी इस युद्ध के मसीहा सरीखे बन गये जिनके मातृभूमि के प्रति निर्भीक जज़्बे ने घटनाक्रम का परिदृश्य बदलने में अहन भूमिका अदा की | माँ भर्ती के रणबांकुरों को शत शत नमन और आपको सृजन के लिए हार्दिक शुभकामनायें |

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    1. जी, बहुत आभार अपनी चिर परिचित शैली में अपनी समीक्षा में अर्थों को विस्तार देने हेतु। आपने सही कहा, अक्सर ऐसे नायक समय की धूल से ढक जाते हैं।

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  13. वाह!!! अद्भुत!!! अद्भुत!!! अद्भुत !!!
    वीर जवानों के अदम्य साहस को प्रदर्शित करती रचना।

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  14. शौर्यगाथा की काव्यात्मक शैली.. बहुत बढ़िया।

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  15. युद्ध की शौर्य-गाथा का चित्रण....।

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