Saturday, 21 March 2020

कविता का फूल (विश्व कविता दिवस पर)

जंगम जलधि जड़वत-सा हो,
स्थावर-सा सो जाता हो।
ललना-सी लहरें जातीं खो,
तब चाँद अकुलाता हैं।

 शीत तमस-सा तंद्रिल तन,
रजनीश का मुरझाया मन।
देख चाँद का भोलापन,
फिर सूरज दौड़ा आता है।

धरती को भी होती धुक-धुक,
उठती हिया में लहरों की हुक।
अभिसार से आर्द्र हो कंचुक,
सौरमंडल शरमाता है।

बाजे नभ में प्रेम पखावज,
ढके चाँद को धरती सूरज।
भाटायें ज्वारों-सी सज-धज,
पाणि-ग्रहण हो जाता है।

उछले उर्मि सागर उर पर,
राग पहाड़ी ज्यों संतूर पर।
प्रीत पूनम मद नूर नूर तर,
चाँद धवल हो जाता है।

प्राकृत-भाव भी अक्षर-से,
चेतन-पुरुष को भर-भर के।
सृष्टि-सुर-सप्तक रच-रच के,
कविता का फूल खिलाता है।




40 comments:


  1. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    22/03/2020 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. सुन्दर शब्द चयन, बढ़िया रचना।

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर कविता ... कविता की उत्पत्ति पर ... रचना के उद्ग़म पर ..।
    शब्द हैं तो कविता है ... भाव हैं तो कविता है ... प्राकृति है .... जीवन है ... समवेदना है ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. आभार आपके आशीर्वचनों का।

      Delete
  4. धरती को भी होती धुक-धुक,
    उठती हिया में लहरों की हुक।
    अभिसार से आर्द्र हो कंचुक,
    सौरमंडल शरमाता है।
    धरती आकाश सूरज चाँद और पूरे सौरमण्डल का अभिसार!!!!
    वाह!!!
    अद्भुत एवं लाजवाब सृजन
    ,🙏🙏🙏

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी, आपके अनुपम आशीष का हार्दिक आभार।

      Delete
  5. हमेशा की तरह लाज़बाब ....,सादर नमन आपको

    ReplyDelete
  6. सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  7. बहुत सुंदर सृजन।

    ReplyDelete
  8. बहुत खूब- आदरणीय विश्वमोहन जी ! समस्त ब्रह्माण्ड में सदैव शाश्वत गतिविधियाँ चलती रहती हैं | सौरमंडल में ग्रह, नक्षत्र गोचर में हैं | जल थल और नभ के सभी घटकों के के बीच स्नेहिल तालमेल और अक्षुण अभिसार कवि मन में कविता का फूल खिलाता है | क्योंकि प्रकृति सबसे बड़ी प्रणेता है सृजन की | और कविता को सभी कलाओं की जननी कहा गया है |आपकी सुपरिचित शैली में ये लाजवाब रचना मन को आहलादित कर देती है | कविता दिवस पर कविता को नयी परिभाषा मिली है -- नये भाव मिले हैं |हार्दिक शुभकामनाएं इस शानदार रचना के लिए | सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपकी उत्साहवर्द्धक टिप्पणियाँ सदैव विलक्षण और संजीवनी होती हैं। हृदयतल से आभार।

      Delete
  9. बहुत सुंदर रचना,विश्वमोहन जी।

    ReplyDelete
  10. बहुत सुंदर रचना

    ReplyDelete
  11. " प्राकृत-भाव भी अक्षर-से,
    चेतन-पुरुष को भर-भर के।
    सृष्टि-सुर-सप्तक रच-रच के,
    कविता का फूल खिलाता है।"
    उत्तम 👌
    सादर प्रणाम सर🙏

    ReplyDelete
    Replies
    1. अत्यंत आभार आँचल जी।

      Delete
  12. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (27-03-2020) को नियमों को निभाओगे कब ( चर्चाअंक - 3653) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    आँचल पाण्डेय

    ReplyDelete
  13. शीत तमस-सा तंद्रिल तन,
    रजनीश का मुरझाया मन।
    देख चाँद का भोलापन,
    फिर सूरज दौड़ा आता है।...बहुत ही खूबसूरत रचना व‍िश्वमोहन जी

    ReplyDelete
  14. कविता को अगर किसी और नाम से पुकारा जा सकता है, तो वो एक फूल ही हो सकता है ।
    अभिनंदन ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत सुंदर और सटीक टिप्पणी। बहुत आभार।

      Delete
  15. प्रभावी अभिव्यक्ति ...

    ReplyDelete
  16. आप इसी तरह ब्रह्मांड और प्रकृति से प्रेरणा लेते रहें और चमन में कविता के फूल खिलते रहें !��

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी, अत्यंत आभार आपकी प्रेरक पंक्तियों एवं आपके आशीर्वचनों का!!🙏🙏🙏

      Delete
  17. कविता की कवित्व अनमोल।
    लाजबाब सृजन।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी, अत्यंत आभार आपके अनमोल बोल के!!!

      Delete
  18. बहुत ही सुन्दर रचना
    विश्व कविता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी, अत्यंत आभार और विश्व कविता दिवस की आपको हार्दिक बधाई!!!

      Delete
  19. उछले उर्मि सागर उर पर,
    राग पहाड़ी ज्यों संतूर पर।
    प्रीत पूनम मद नूर नूर तर,
    चाँद धवल हो जाता है।👌👌👌👌👌👌
    एक बार फिर से ये मनभावन, मनोरम सृजन पढ़कर अच्छा लगा। हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपके आशीष की पुनरावृत्ति का फिर से और दिल से आभार!!!

      Delete