Sunday, 16 October 2022

दंभ दामिनी

 खुद कपटी थे, क्या समझो तुम!

निश्छलता क्या होती है।

तेरी हर खुदगर्जी पर,

बस टीस-सी दिल में होती है।


मेरी हर बातों में तुमको,

केवल व्यंग्य झलकता है।

जबकि हर हर्फ वह तेरा,

मुझको पल-पल छलता है।


बात बात तेरी घुड़की कि,

मुझे छोड़ तुम जाओगे।

मेरी यादों की गलियों में,

नहीं कभी तुम आओगे।


तुम भी सुन लो, नहीं मिटेगी,

गलियों की पद जोड़ी रेखा।

मेरा रंग तो सदा एक-सा,

रंगहीन नेह तेरा देखा।


हम कहते, छोड़ो हठात हठ,

और दंभ का दामन अपना!

अहंकार को आहूत कर दो,

हसरतों का बुनों सपना।


हुई दग्ध तुम, दर्प निदाघ में

और न दहको, दंभ दामिनी।

देखो, दूधिया दमके चांदनी

राग यमन में झूमे यामिनी।









24 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज सोमवार 17 अक्टूबर, 2022 को     "पर्व अहोई-अष्टमी, व्रत-पूजन का पर्व" (चर्चा अंक-4584)    पर भी है।
    --
    कृपया कुछ लिंकों का अवलोकन करें और सकारात्मक टिप्पणी भी दें।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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  2. कोमल शब्दों में मन की टीस उजागर हो रही है । भवपूर्ण अभिव्यक्ति ।

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  3. इमोशनल अत्याचार शायद इसी को कहते हैं

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  4. प्रभावी भावपूर्ण अभिव्यक्ति।
    बधाई

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  5. अति सुंदर...शानदार...कविता ..वाह क्‍या खूब कहा कि ''हुई दग्ध तुम, दर्प निदाघ में

    और न दहको, दंभ दामिनी।

    देखो, दूधिया दमके चांदनी

    राग यमन में झूमे यामिनी।''

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  6. विरही मन की मर्मांतक अभिव्यक्ति! वेदना पगे मन की चीत्कार तंज में बदल बहुत हृदयविदारक हो गई है।नयी शैली की रचना के लिए बधाई।
    दीपोत्सव पर सपरिवार हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं स्वीकार करें।🙏

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    1. जी, बहुत आभार और दीपोत्सव की सपरिवार बधाई!!!

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  7. हाले दिल बयां करती भावपूर्ण अभिव्यक्ति
    बहुत खूब 👌👌

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  8. सुन्दर रचना । दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ l

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    1. जी, बहुत आभार और शुभ दीपावली🌹🌹🌹

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  9. हृदयस्पर्शी अभिनव कृति । दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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    1. जी, बहुत आभार! दीपावली की शुभकामनाएं!🌹

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  10. यथार्थपूर्ण भावनात्मक शब्दों की अद्भुत माला ।
    बेहद खूबसूरत

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    1. जी, बहुत आभार। शुभ दीपावली!

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