Monday, 31 January 2022

वसंत



जीवन  घट  में  कुसुमाकर  ने,  
रस  घोला है  फिर चेतन  का।
शरमायी सुरमायी कली में,  
शोभे  आभा  नवयौवन  का।

डाल-डाल  पर  नवल  राग में,
पवन मदिरा मृदु प्रकम्पन।
अठखेली लतिका ललना की, 
तरु-किशोर का नेह-निमंत्रण।

पत्र दलों की नुपुर-ध्वनि सुन,  
वनिता  खोले  घन केश-पाश।
उल्लसित पादप-पुंज वसंत में,
नभ तैरे उर का उच्छवास।

मिलिन्द उन्मत्त, मकरन्द मिलन में, 
मलयज बयार,   मदमस्त मदन  में।
चतुर  चितेरा,  चंचल  चितवन  में,  
कसके   हुक    वक्ष-स्पन्दन   में।

प्रणय  पाग  की  घुली  भंग,  
रंजित पराग पुंकेसर   रंग।
मुग्ध मदहोश सौन्दर्य-सुधा,  
रासे  प्रकृति  पुरुष  संग।

पपीहे  की प्यासी पुकार में,
चिर संचित  अनुराग अनंत है।
सृष्टि का यह  चेतन क्षण है,
आली! झूमो आया वसंत है।

विश्वमोहन   

36 comments:

  1. NITU THAKUR's profile photo
    NITU THAKUR
    Owner
    +2
    वाह !!! बहुत खूब
    शानदार रचना
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    Jan 30, 2018
    Meena Gulyani's profile photo
    Meena Gulyani
    +2
    khoobsurat rachna
    Jan 30, 2018
    Vishwa Mohan's profile photo
    Vishwa Mohan
    +1
    +Nitu Thakur आपके आशीष का आभार!!!
    Jan 30, 2018
    Vishwa Mohan's profile photo
    Vishwa Mohan
    +1
    +Meena Gulyani आपके आशीष का आभार!!!
    Jan 30, 2018
    Meena Gulyani's profile photo
    Meena Gulyani
    welcome

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  2. Kusum Kothari's profile photo
    Kusum Kothari
    Moderator
    +1
    सुंदर अलंकारों और सुंदर शब्द विन्यास से सुसज्जित सुंदर श्रृंगार रचना।
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    Jan 30, 2018
    Vishwa Mohan's profile photo
    Vishwa Mohan
    +1
    +Kusum Kothari आपके आशीष का आभार!!!
    Jan 30, 2018
    anchal pandey's profile photo
    anchal pandey
    +1
    वाह बहुत सुंदर 👌
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    Jan 30, 2018
    Vishwa Mohan's profile photo
    Vishwa Mohan
    +1
    +anchal pandey आभार आपके आशीष का!

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  3. बहुत सुन्दर विश्वमोहन जी ! आप तो वसंत वर्णन करते समय पद्माकर और देव के शिष्य लगते हैं.

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    1. आपके आशीष ने मन को और वासंती बना दिया.

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  4. अद्भुत आदरणीय।।। बेहतरीन सृजन

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!!!

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  5. मुग्ध होना है। मुदित होना है। प्रबुद्ध होना है या शुद्ध होना है तो आपसे बड़ी बगिया नहीं आपसे बड़ी पाठशाला नहीं। ज़िंदाबाद कविवर

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!!!

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  6. वाह आदरणीय सर मंत्रमुग्ध करती सुंदर रचना
    सादर नमन

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!!!

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  7. पपीहे की प्यासी पुकार में,
    चिर संचित अनुराग अनंत है/
    सृष्टि का यह चेतन क्षण है,
    अलि! झूमो आया वसंत है //
    छायावादी कवियों सी काव्य छटा लिए सुंदर सलोनी रचना | शुभकामनायें आदरणीय कविवर !!!!

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका।

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  8. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    २५ मार्च २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. जी, अत्यंत आभार हृदय - तल से।

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    2. डाल डाल पर नवल राग में,
      पवन मदिरा मृदु प्रकम्पन/
      अठखेली लतिका ललना की,
      तरु किशोर का नेह निमंत्रण //
      बहुत ही लाजवाब रचना...वसंत सी मनभावनी....
      वाह!!!!

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    3. जी, अत्यंत आभार।

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  9. बहुत बहुत सुन्दर सरस रचना

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  10. बसंत पर अदभुत, उत्कृष्ट सृजन ।

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  11. Jude hmare sath apni kavita ko online profile bnake logo ke beech share kre
    Pub Dials aur agr aap book publish krana chahte hai aaj hi hmare publishing consultant se baat krein Online Book Publishers



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  12. सुन्दर श्रृंगारिक रचना

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  13. मिलिन्द उन्मत्त, मकरन्द मिलन में,
    मलयज बयार, मदमस्त मदन में।
    चतुर चितेरा, चंचल चितवन में,
    कसके हुक वक्ष-स्पन्दन में।
    अनुप्रास से सुसज्जित मधुर रचना।अच्छा लगा इसे एक बार फिर से पढ़कर !!🙏🙏

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  14. Thank you very much for this useful article.streetwearcart I like it.

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