Sunday, 9 February 2014

वसंत



जीवन  घट  में  कुसुमाकर  ने,  
रस  घोला है  फिर चेतन  का।
शरमायी सुरमायी कली में,  
शोभे  आभा  नवयौवन  का।

डाल-डाल  पर  नवल  राग में,
पवन मदिरा मृदु प्रकम्पन।
अठखेली लतिका ललना की, 
तरु-किशोर का नेह-निमंत्रण।

पत्र दलों की नुपुर-ध्वनि सुन,  
वनिता  खोले  घन केश-पाश।
उल्लसित पादप-पुंज वसंत में,
नभ तैरे उर का उच्छवास।

मिलिन्द उन्मत्त, मकरन्द मिलन में, 
मलयज बयार,   मदमस्त मदन  में।
चतुर  चितेरा,  चंचल  चितवन  में,  
कसके   हुक    वक्ष-स्पन्दन   में।

प्रणय  पाग  की  घुली  भंग,  
रंजित पराग पुंकेसर   रंग।
मुग्ध मदहोश सौन्दर्य-सुधा,  
रासे  प्रकृति  पुरुष  संग।

पपीहे  की प्यासी पुकार में,
चिर संचित  अनुराग अनंत है।
सृष्टि का यह  चेतन क्षण है,
अलि! झूमो आया वसंत है।

विश्वमोहन   

18 comments:

  1. NITU THAKUR's profile photo
    NITU THAKUR
    Owner
    +2
    वाह !!! बहुत खूब
    शानदार रचना
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    Jan 30, 2018
    Meena Gulyani's profile photo
    Meena Gulyani
    +2
    khoobsurat rachna
    Jan 30, 2018
    Vishwa Mohan's profile photo
    Vishwa Mohan
    +1
    +Nitu Thakur आपके आशीष का आभार!!!
    Jan 30, 2018
    Vishwa Mohan's profile photo
    Vishwa Mohan
    +1
    +Meena Gulyani आपके आशीष का आभार!!!
    Jan 30, 2018
    Meena Gulyani's profile photo
    Meena Gulyani
    welcome

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  2. Kusum Kothari's profile photo
    Kusum Kothari
    Moderator
    +1
    सुंदर अलंकारों और सुंदर शब्द विन्यास से सुसज्जित सुंदर श्रृंगार रचना।
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    Jan 30, 2018
    Vishwa Mohan's profile photo
    Vishwa Mohan
    +1
    +Kusum Kothari आपके आशीष का आभार!!!
    Jan 30, 2018
    anchal pandey's profile photo
    anchal pandey
    +1
    वाह बहुत सुंदर 👌
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    Jan 30, 2018
    Vishwa Mohan's profile photo
    Vishwa Mohan
    +1
    +anchal pandey आभार आपके आशीष का!

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  3. बहुत सुन्दर विश्वमोहन जी ! आप तो वसंत वर्णन करते समय पद्माकर और देव के शिष्य लगते हैं.

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    1. आपके आशीष ने मन को और वासंती बना दिया.

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  4. अद्भुत आदरणीय।।। बेहतरीन सृजन

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!!!

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  5. मुग्ध होना है। मुदित होना है। प्रबुद्ध होना है या शुद्ध होना है तो आपसे बड़ी बगिया नहीं आपसे बड़ी पाठशाला नहीं। ज़िंदाबाद कविवर

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!!!

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  6. वाह आदरणीय सर मंत्रमुग्ध करती सुंदर रचना
    सादर नमन

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका!!!

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  7. पपीहे की प्यासी पुकार में,
    चिर संचित अनुराग अनंत है/
    सृष्टि का यह चेतन क्षण है,
    अलि! झूमो आया वसंत है //
    छायावादी कवियों सी काव्य छटा लिए सुंदर सलोनी रचना | शुभकामनायें आदरणीय कविवर !!!!

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    1. जी, अत्यंत आभार आपका।

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  8. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    २५ मार्च २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. जी, अत्यंत आभार हृदय - तल से।

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    2. डाल डाल पर नवल राग में,
      पवन मदिरा मृदु प्रकम्पन/
      अठखेली लतिका ललना की,
      तरु किशोर का नेह निमंत्रण //
      बहुत ही लाजवाब रचना...वसंत सी मनभावनी....
      वाह!!!!

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    3. जी, अत्यंत आभार।

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