Friday, 15 May 2026

सीखना


 

मैने कहा,

मुझे लिखना सिखा दो।

उसने कहा,

पहले सीखना सिखो।

मैने कहा,

वही सिखा दो।

...

...

मुझे लिखना आ गया।

सीखना अभी भी सीख रहा हूँ।

Thursday, 30 April 2026

आये हो, तो जाओगे।

है विदित जो जीव का,

प्रारब्ध और गंतव्य यही।

हर मिलन के बीज में  है,

विरह का भवितव्य ही।


न रहा अपवाद कोई,

द्युलोक, अंतरिक्ष, पृथ्वी।

समय चक्र सब नाचते,

ग्रह गोचर और रवि।


आये हो, तो जाओगे।

फिर सोचते हो क्या?कवि!

सर्वं खलु ईदम ब्रह्म,

हो आहूत बन हवि।



Monday, 16 March 2026

जहाँ ना संशय, ना कोई डर!

 



हो किरणों पर न कोई पहरा,
चिड़ियों की चहक चिरंतन हो।
तर तुषार तृण फुनगी फुदके,
चेतन का स्वर- स्पंदन हो।

तरु  हरित पत्र गोल-गोल,
झूमें गायें डोल-डोल।
टहनी से डंठल लिपट-लिपट,
खुसुर-फुसूर फिर बोल-बोल।

कौओं की पंचायत से,
फदगुदियाँ ले रहीं होड़।
अपना हुक़ूक़ हैं जता रहीं,
गिलहरियाँ माटी कोड़-कोड़।

सन्नाटे का सुर सरोवर,
शकल दिल-सी रंगी नील।
जलतरंग में छाया नर्तन,
गोद गिरि गदरायी झील।

सभी स्वच्छंद हैं, सभी मुक्त हैं,
कण-कण चिन्मय अजर अमर।
हे पवन प्राण, सुन, ठहर यहीं,
जहाँ ना संशय, ना कोई  डर!