Monday, 6 October 2014

तनुजा, तू ही तप जीवन का !

दुहिता दिवस (Daughter’s Day) को समर्पित


तनुजा, तू ही तप जीवन का,
तन, वतन, मन और कण-कण का.
मेरे दिल की हर धड़कन का,
प्रतिबिम्ब मेरे बचपन का.

तुझे देख, मैं भूलूं हर दुख,
तेरी चाहत में पाऊं सुख.
मन्नत मांगु तेरी मुस्कान का,
तनुजा तू ही तप जीवन का.

मैं निहारूं तुममें अपने को,
बेटी, सजा दो मेरे सपने को.
बन जाऊं बलि मैं तुझ वामन का,
तनुजे, तू ही तप जीवन का.

जिस दिवस तनया तू हो दिग्वंचित,
रहे राष्ट्र, धर्म, सृष्टि न संचित.
खेल खतम तब जन-गण-मन का.
तनुजे, तू ही तप जीवन का.

जीवन समर में कभी न थकना,
सकने की सीमा तक सकना.
सौगंध तेरे सुंदर आचरण का,
तनुजे, तू ही तप जीवन का.

हर काबा में, हर काशी में,
सतनारायण,  पूरणमासी में.
मांगू आशीष तेरे पल्लवन का,
तनुजे, तू ही तप जीवन का.

सृष्टि के नयनों का तारा,
हे समाज की जीवन धारा.
बनो विजेता जीवन रण का,
तनुजे, तू ही तप जीवन का.

मेरी याचना न करना विस्मृत,
रचो सफलता का नित नव गीत.
कृपा वृष्टि हो तुमपर भगवन का,
तनुजे, तू ही तप जीवन का.

मधुर स्मृति जीवन वीथि का,
शुभ्र पुनम की चंद्र तिथि का.
धवल यूथिका मेरे चमन का,
तनुजे, तू ही तप जीवन का.

जागो, उठो, अब थामो केतन,
जीत लो पुत्री, सब जड़- चेतन.
यही स्वप्न है विश्वमोहन का,
तनुजे तू ही तप जीवन का.