ज़िन्दगी की कथा बांचते बाँचते, फिर! सो जाता हूँ। अकेले। भटकने को योनि दर योनि, अकेले। एकांत की तलाश में!
मैने कहा,
मुझे लिखना सिखा दो।
उसने कहा,
पहले सीखना सिखो।
वही सिखा दो।
...
मुझे लिखना आ गया।
सीखना अभी भी सीख रहा हूँ।
बहुत सुंदर! माँ की सीख ताउम्र चलती है
जी, हार्दिक आभार।
नमन |
हार्दिक आभार।
सुंदर
जी, आभार।
बहुत सुंदर! माँ की सीख ताउम्र चलती है
ReplyDeleteजी, हार्दिक आभार।
Deleteनमन |
ReplyDeleteहार्दिक आभार।
Deleteसुंदर
ReplyDeleteजी, आभार।
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