Tuesday, 29 September 2026

बस, यूँ ही थामे रहना।


 

हवा की बरजोरी,

शाखा का सिहरना।

टहनी की गलबाँही,

पलक मिलमिलाना।


पत्ते की छुअन,

बहारों का छाना।

दिल का फ़साना,

या कोई अफ़साना!


हवा, शाखा, टहनी,

पत्ता-पत्ता  हम- तुम,

ये उल्फ़त का मंजर,

हुए हम तुम गुम- सुम।


साँसों की शोर,

मन सराबोर।

हिया की हुक हुक,

पिरितिया की डोर।


कासे कहूँ, जो

आया न हमें कहना।

भावों की भँवरी,

बस, यूँ ही थामे रहना।

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