Saturday, 7 November 2026

चलो! राम से जोड़ें नाता


 चलो! राम से जोड़े नाता


मन भी तुम ही, और प्राण हो,

शब्द-स्पर्श, रूप-रस  घ्राण हो।।

जड़ भी तुम ही, चेतन तुम ही,

अवचेतन, निश्चेतन तुम ही।


तुम ही तुरीय, तुम ही स्वप्न,

तुम ही जाग्रत और सुषुप्त हो।

अंतःस्थल के अन्वेषण के,

सोपानों के सूत्र गुप्त हो।


टंकार प्रणव के आदि बिंदु तुम,

सृष्टि तुम हो, प्रलय तुम हो।

भव सागर से मोक्ष यज्ञ के,

मेरे मालिक तुम अक्षय हो।


चतुर्वेद, उपनिषद, गीता,

नहीं ज्ञान तुमसे कोई रीता।

होता हो, अध्वर्यु तुम भी,

तुम ही ब्रह्म, तुम हो उद्गाता।


चलो! राम से जोड़े नाता।

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